भूमि संरक्षण पदाधिकारी हिमांशु कुमार ने बिना जांच ही किया खंडन, मीडिया से मिली जानकारी को नजरअंदाज कर रहे अधिकारी ।।
चतरा (संजीत मिश्रा)। एक ओर देश सहित पूरा राज्य दिशोम गुरु शिबू सोरेन की मौत पर तीन दिवसीय शोक में डूबा है तो वही दूसरी ओर चतरा जिले में जलमग्न तालाब में पोकलेन मशीन से तालाब को नया रूप देने के कार्य किया जा रहा है । जिले में भूमि संरक्षण विभाग द्वारा कराए जा रहे तालाबों के निर्माण और जीर्णोद्धार कार्य में भारी अनियमितता और नियमों की अनदेखी सामने आई है। यह कोई नई बात नहीं कि फर्जी रिपोर्टों के आधार पर कार्यों की स्वीकृति दी जाती है, लेकिन इस बार जो सबसे चौंकाने वाली बात सामने आई है, वह यह कि जुलाई और अगस्त के महीने में जब तालाब पूरी तरह जलमग्न है, उसी समय पोकलेन मशीन से कार्य कराकर लाखों रुपये की सरकारी राशि की निकासी के लिए खेल खेला जा रहा है । तालाब के भीड़ को जेसीबी से नया रूप दिया जा रहा है, ताकि दस्तावेज़ी सबूत के रूप में कुछ दिखाया जा सके।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिले में अगर 10 सकारात्मक कार्य होते हैं तो 90 नकारात्मक और संदेहास्पद कार्य हो रहे हैं, जिनमें संबंधित विभागों के अधिकारियों व कर्मियों की सीधी संलिप्तता से इनकार नहीं किया जा सकता। यदि कार्य स्थल की सच्चाई और संबंधित दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच की जाए, तो कई फर्जीवाड़े सामने आ सकते हैं।
-नियमों को ठेंगा, शिकायतों को ठंडे बस्ते में डाल रहा प्रशासन
चतरा जिले में न तो नियमों की परवाह है, न जवाबदेही की भावना। यदि ग्रामीण या अन्य नागरिक फर्जीवाड़े की शिकायत करते हैं, तो उन्हें ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। जनप्रतिनिधि भी इन मामलों में कोई विशेष रुचि नहीं दिखाते। यही कारण है कि कर्मियों से लेकर अधिकारी तक बेलगाम और बेपरवाह होते जा रहे हैं।
एक ताजा मामला तब सामने आया, जब बरसात के मौसम में जलमग्न आहर में निर्माण कार्य की जानकारी मीडिया द्वारा भूमि संरक्षण पदाधिकारी हिमांशु कुमार को दी गई। लेकिन उन्होंने बिना स्थल निरीक्षण के ही वीडियो को ‘पुराना’ बता कर पल्ला झाड़ लिया, जबकि मौके पर अब तक पोकलेन मशीन काम कर रही है। यह अधिकारियों की लापरवाही और संरक्षण का सीधा प्रमाण माना जा रहा है।
शिकायतकर्ता का आरोप: तालाब का नाम बदलकर हो रहा फर्जी निर्माण कार्य
इस पूरे मामले में एक विस्तृत और दस्तावेज़ीय शिकायत भी सामने आई है, जिसमें शिकायतकर्ता संतोष कुमार सिंह, निवासी ग्राम पंदनी, वर्तमान में ग्राम ईटखोरी, चतरा निवासी ने आरोप लगाया है कि उपरोक्त भूमि पर पहले से ही 6.34 एकड़ क्षेत्रफल में ‘बड़का आहर’ नामक तालाब मौजूद है, जिसका उल्लेख खतियान में भी दर्ज है। लेकिन भूमि संरक्षण विभाग ने गलत तरीके से केवल 4.34 एकड़ की रिपोर्टिंग कर आहर का नाम बदलकर ‘बेराही आहर’ कर दिया है और उसी आधार पर मिट्टी खुदाई का कार्य शुरू करवा दिया गया है। यह न सिर्फ नियम विरुद्ध है, बल्कि इससे तालाब की संरचना और पर्यावरणीय संतुलन को भी नुकसान पहुंच सकता है।शिकायत में यह भी कहा गया है कि भूमि संरक्षण विभाग को अधिकतम 5 एकड़ तक के तालाब कार्य की स्वीकृति होती है। 5 एकड़ से ज्यादा जमीन पर कार्य होना हो तो टेंडर प्रक्रिया जरूरी होती है, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। उन्होंने मामले की उच्च स्तरीय जांच कर कार्य पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।
चतरा जिले में भूमि संरक्षण विभाग द्वारा किए जा रहे तालाब निर्माण कार्यों में भारी अनियमितता, फर्जीवाड़ा और प्रशासनिक लापरवाही के गंभीर आरोप हैं। यह सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि प्राकृतिक संसाधनों और ग्रामीण हितों की भी क्षति है। यदि मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो यह एक और उदाहरण होगा कि कैसे व्यवस्था की कमजोरियाँ, भ्रष्टाचार के हाथों की कठपुतली बन कर रह गई हैं।