ना दिया इस्तीफा, ना खाता ट्रांसफर – सासू मां पकाने लगी मिड-डे मील, पैसा बहू के नाम ।
लावालौंग/चतरा। चतरा जिले के लावालौंग प्रखंड अंतर्गत सिलदाग पंचायत के एक स्कूल में ऐसा गजब कारनामा सामने आया है, जिसने विभागीय लापरवाही और ग्राम स्तर पर जारी “भ्रष्टाचार गठजोड़” की पोल खोल दी है। प्राथमिक विद्यालय तिलोरवातरी में पदस्थापित रसोईया कसीदा देवी बीते तीन साल से पंचायत की मुखिया भी बनी हुई हैं – पर विभाग को भनक तक नहीं ।
तीन साल से दोहरी भूमिका का नाटक
कसीदा देवी पहले से ही स्कूल में रसोईया थीं। लेकिन वर्ष 2021 में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में जीतकर मुखिया बनीं। नियम के अनुसार उन्हें रसोईया पद से त्यागपत्र देना था, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। उल्टा, अपने पद का लाभ उठाकर दबाव बनाते हुए न तो इस्तीफा दिया और न ही खाते का ट्रांसफर कराया।
स्कूल में खाना सास पकाती है , भुगतान बहू के नाम
जानकारी के अनुसार, वर्तमान में स्कूल में मिड-डे मील की रसोई मुखिया कसीदा देवी की सास बना रही हैं। लेकिन खाते में नाम अब भी बहू का है! पूछे जाने पर सास ने खुद बताया कि मैं ही खाना बनाती हूं, लेकिन पैसे बहू के खाते में जाते हैं। जब बहुत ज़ोर देती हूं तो बेटा रंजीत भारती के हाथों से कुछ पैसे मिलते हैं।”
बीईईओ ने दिए जांच के आदेश, दस्तावेजों से पुष्टि
मामला उजागर होने के बाद प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी (बीईईओ) ने अनिल गुप्ता (बीआरपी) और रंजीत कुमार (ऑपरेटर) को जांच की जिम्मेदारी दी। जांच में सामने आया कि स्कूल के प्रधानाध्यापक सुरजीत यादव वर्षों से विभाग को गुमराह कर रहे थे। वे घटना के दिन भी अनुपस्थित थे। दस्तावेजों से स्पष्ट हुआ कि रसोईया के रूप में अब भी खाते में कसीदा देवी का ही नाम दर्ज है।
बीपीओ ईश्वर राम ने कहा कि मामला गंभीर है। अब तक जो भी राशि मुखिया के नाम पर गई है, उसकी वसूली (रिकवरी) की जाएगी। साथ ही संबंधित प्रधानाध्यापक से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि पंचायत प्रमुख होकर ऐसी धोखाधड़ी करना न सिर्फ नियमों के खिलाफ है बल्कि यह पंचायत की गरिमा से भी खिलवाड़ है। मामले की भनक मिलते ही ग्रामीणों में आक्रोश है। लोगों ने इस प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच और कड़ी विभागीय कार्रवाई की मांग की है।