ज़मीनी सच्चाई कुछ और सैंया भईल कोतवाल, तो डर किसका?’ चतरा में भ्रष्टाचार बेलगाम ।।

गरीबों का हक लूटा गया अफसर खामोश , अब चतरा उपायुक्त से निष्पक्ष जांच की आस ।।
चतरा(संजीत मिश्रा)। झारखण्ड का एक ऐसा जिला जहां कागज़ों में सब कुछ दुरुस्त है, पोर्टल पर योजनाएं पूरी दिखाई जा रही हैं और पंचायतों में डिजिटल बोर्ड चमक रहे हैं । लेकिन ज़मीन पर हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। चतरा जिले के कई प्रखंडों में मनरेगा और प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के नाम पर जो खेल चल रहा है, वह अब सिर्फ अनियमितता नहीं बल्कि संगठित लूट का रूप ले चुका है। ग्रामीणों की शिकायत, दस्तावेज़ों की पड़ताल ,अधिकारियों की जांच रिपोर्ट और स्थल निरीक्षण में सामने आए तथ्यों ने यह साफ कर दिया है कि सरकारी योजनाएं गरीबों के लिए नहीं, बल्कि कमीशनखोर तंत्र के लिए चल रही हैं और हैरानी की बात यह है कि सब कुछ अधिकारियों की जानकारी में ।
चतरा जिले में मनरेगा योजनाओं में जिस तरह से खुली लूट मची हुई है, उसने शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कई प्रखंडों के कई पंचायतों में डिजिटल बोर्ड लगाकर सिर्फ सरकारी राशि की निकासी का खेल जारी है, जबकि ज़मीनी स्तर पर कार्य या तो अधूरा है या पूरी तरह गायब। सबसे गंभीर बात यह है कि इन गड़बड़ियों की पूरी जानकारी होने के बावजूद वरीय अधिकारियों का अप्रत्यक्ष संरक्षण इस पूरे खेल को और मजबूत कर रहा है। चर्चा आम है कि कमीशन की राशि में बराबर के हिस्सेदार होने के कारण कार्रवाई पर ताला लगा हुआ है। ऐसे में ग्रामीणों के बीच यह कहावत सटीक बैठती है । सैंया भईल कोतवाल तो डर किसका?
कान्हाचट्टी का तुलबुल पंचायत: जांच हुई तो बड़े घोटाले होंगे बेनकाब..
कान्हाचट्टी प्रखंड के तुलबुल पंचायत में यदि ऑनलाइन दर्ज कार्यों की वर्तमान स्थिति के अनुरूप स्थलीय जांच कराई जाए, तो कई बड़े घोटाले बेनकाब हो सकते हैं। बावजूद इसके, जिम्मेदार अधिकारी आंख मूंदे बैठे हैं।
प्रधानमंत्री के निर्देश भी बेअसर : 3359 आवास बिना मजदूरी भुगतान बंद…
चतरा जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत मनरेगा से मजदूरी भुगतान के स्पष्ट निर्देश के बावजूद, माननीय प्रधानमंत्री के आदेशों को मनरेगा कर्मियों ने ठेंगा दिखा दिया। आवास पोर्टल पर 3359 आवासों को बिना मजदूरी भुगतान के ही बंद कर दिया गया, जो सीधे-सीधे गंभीर अनियमितता की ओर इशारा करता है। एक सामाजिक व्यक्ति का कहना है कि जब प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) ही प्रखंड स्तर पर मनरेगा और आवास योजना दोनों की देखरेख करते हैं, तो फिर बिना मजदूरी भुगतान के आवास योजना बंद कैसे कर दी गई? क्या वजह यह है कि आवास की मजदूरी राशि में कमीशन नहीं मिलता या फिर बिना निर्माण के ही आवास को पूर्ण दिखाकर राशि की बंदरबांट कर ली गई?
प्रतापपुर में 764 आवास— मजदूरी शून्य, योजना पूर्ण
प्रतापपुर प्रखंड में तो स्थिति और भी चौंकाने वाली है, जहां 764 आवासों को बिना मजदूरी भुगतान किए ही बंद कर दिया गया। यह सवाल अब जोर पकड़ रहा है कि क्या यहां भी कमीशन नहीं मिलने के कारण मजदूरी नहीं दी गई? या फिर कागजों में आवास बनाकर सरकारी धन की लूट कर ली गई?
बिचौलियों का बोलबाला, लाभुक अनजान…
नियम स्पष्ट है कि आवास योजना की मजदूरी राशि लाभुक या उनके परिवार के सदस्यों के जॉब कार्ड खाते में ही भुगतान की जानी है, लेकिन कान्हाचट्टी प्रखंड के तुलबुल पंचायत में लाभुकों को इसकी जानकारी तक नहीं, और बिचौलिये मजदूरी की राशि निकाल ले रहे हैं। इस गड़बड़ी को राष्ट्रीय शान समाचार पत्र में उजागर किया जा चुका हैं, फिर भी जांच और कार्रवाई शून्य क्यों? पूर्व मुखिया के कार्यकाल में मदगड़ा पंचायत में बिचौलियों और रोजगार सेवक पर कार्रवाई हो चुकी है, तो फिर तुलबुल पंचायत में कार्रवाई क्यों नहीं? क्या कारण यह है कि यहां पैसे बोल नहीं रहा है इसलिए जांच आगे नहीं बढ़ रही?
अब उम्मीद की आखिरी किरण उपायुक्त चतरा कीर्ति श्री जी….
पूरे मामले में अब न्याय, पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच की उम्मीद सिर्फ चतरा के उपायुक्त श्रीमती कीर्ति श्री जी पर टिकी हुई है। यदि उन्होंने मनरेगा और प्रधानमंत्री आवास योजना स्वतंत्र और ज़मीनी जांच के आदेश दिए, तो वर्षों से चल रहे इस भ्रष्टाचार के जाल का पर्दाफाश तय है। अब सवाल यह नहीं कि घोटाला हुआ या नहीं, सवाल यह है कि कब होगी कार्रवाई और कब मिलेगा गरीब मजदूरों को उनका हक व अधिकार ?





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