जनसंपर्क तेज, लेकिन जनमानस मौन , किसके पक्ष में जाएगा रुख??

चतरा(संजीत मिश्रा): चतरा शहर में नगर परिषद चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी चरम पर है। प्रत्याशी अपनी-अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं। डोर-टू-डोर जनसंपर्क, मोटरसाइकिल रैली , वाहनों से प्रचार- प्रसार और लगातार जनसंवाद का दौर जारी है। इसके बावजूद सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि मतदाताओं में खुलकर उत्साह दिखाई नहीं दे रहा है। शहर के विभिन्न वार्डों में मतदाताओं की खामोशी ने प्रत्याशियों के बीच असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है। कार्यकर्ता सक्रिय हैं, रणनीतियां बन रही हैं, लेकिन जनता का रुख अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाया है।
नगर परिषद चुनाव में इस बार होल्डिंग टैक्स ,विकास, स्वच्छता, सड़क, जलनिकासी, पेयजल और शहर की मूलभूत सुविधाएं मुख्य मुद्दे बने हुए हैं। प्रत्याशी जनता को अपने पक्ष में करने के लिए वादों और योजनाओं का खाका प्रस्तुत कर रहे हैं। वहीं राजनीतिक जानकारों का मानना है कि केवल प्रचार से नहीं, बल्कि प्रत्याशी की छवि और पूर्व कार्यशैली से भी मतदाता प्रभावित होंगे। जनता की ख़ामोशी प्रत्याशियों की बेचैनी बढ़ा दिया है ।
इस बार यह भी देखने को मिल रहा है कि मतदाता पहले की तुलना में अधिक सजग और समझदार हो चुके हैं। वे केवल समर्थित पार्टी के समर्थन के आधार पर नहीं, बल्कि व्यक्तिगत पहचान और क्षेत्र में किए गए कार्यों को ध्यान में रखकर निर्णय लेने की तैयारी में हैं। हर उम्मीदवार चाहता है कि अधिक से अधिक लोग उसे व्यक्तिगत रूप से जानें और पहचानें, क्योंकि पहचान ही वोट में तब्दील होती है । मतदाताओं की खोमोशी के लेकर प्रत्याशी पूरी तरह आश्वस्त नहीं दिख रहे हैं। फिलहाल चुनावी माहौल में प्रचार का शोर जरूर है, लेकिन मतदाताओं की खामोशी ने मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है। अंतिम निर्णय मतपेटी से ही निकलेगा, लेकिन इतना तय है कि इस बार चतरा नगर परिषद चुनाव में जनता का रुख ही जीत-हार की असली कुंजी साबित होगा।

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