झारखंड के 14 जिलों में 10 फरवरी से शुरू होगा मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एमडीए) अभियान , दवा से होने वाले हल्के लक्षण प्रतिकूल प्रभाव नहीं, बल्कि फाइलेरिया परजीवियों के नष्ट होने का संकेत

रांची/देवघर : फाइलेरिया-मुक्त झारखंड के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में राज्य सरकार द्वारा राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत संचालित मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एमडीए) अभियान को सफल बनाने हेतु अंतर्विभागीय समन्वय, सामुदायिक सहभागिता एवं मीडिया सहयोग को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है।
इसी क्रम में रविवार को देवघर में स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग, झारखंड सरकार तथा ग्लोबल हेल्थ स्ट्रेटेजीज़ के संयुक्त तत्वावधान में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), पीरामल स्वास्थ्य सहित अन्य सहयोगी संस्थाओं के समन्वय से एक मीडिया संवेदीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी (भी.बी.डी.) डॉ. बिरेंद्र कुमार सिंह ने झारखंड से फाइलेरिया उन्मूलन के प्रति राज्य की दृढ़ प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि समयबद्ध एवं प्रभावी एमडीए अभियान इस लक्ष्य को प्राप्त करने की सबसे महत्वपूर्ण रणनीति है।
डॉ. सिंह ने जानकारी दी कि 10 फरवरी से 25 फरवरी 2026 तक राज्य के 11 जिलों— बोकारो, देवघर, धनबाद, पूर्वी सिंहभूम, गढ़वा, गिरिडीह, गुमला, रामगढ़, रांची, साहिबगंज एवं लोहरदगा में दो दवाओं डी.ई.सी. एवं अल्बेंडाज़ोल के माध्यम से एमडीए अभियान चलाया जाएगा। वहीं 3 जिलों— कोडरमा, पाकुड़ एवं सिमडेगा में तीन दवाओं डी.ई.सी., अल्बेंडाज़ोल एवं आइवरमेक्टिन के माध्यम से दवा वितरण किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस अभियान के तहत स्वास्थ्यकर्मी बूथों के माध्यम से तथा घर-घर जाकर पात्र लाभार्थियों को फाइलेरिया-रोधी दवाएं खिलाएंगे। 2 वर्ष से कम आयु के बच्चे, गर्भवती महिलाएं एवं गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति इस अभियान के दायरे में नहीं होंगे। दवा का सेवन खाली पेट नहीं किया जाएगा तथा आशा कार्यकर्ता या स्वास्थ्यकर्मी की उपस्थिति में दवा सेवन अनिवार्य होगा।
डॉ. सिंह ने स्पष्ट किया कि दवा सेवन के बाद कुछ लोगों में मितली, चक्कर या हल्का बुखार जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं, जो किसी प्रकार के प्रतिकूल प्रभाव नहीं बल्कि शुभ संकेत हैं। इसका अर्थ है कि शरीर में मौजूद फाइलेरिया परजीवी दवा के प्रभाव से नष्ट हो रहे हैं। ऐसे में घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है। इस अवसर पर देवघर के सिविल सर्जन डॉ. बच्चा प्रसाद सिंह ने कहा कि जनभागीदारी और मीडिया सहयोग के बिना फाइलेरिया उन्मूलन का लक्ष्य प्राप्त करना संभव नहीं है। उन्होंने आगामी एमडीए अभियान में शत-प्रतिशत कवरेज सुनिश्चित करने हेतु मीडिया से सक्रिय सहयोग का आह्वान किया। उन्होंने मीडिया से अपील की कि सकारात्मक, तथ्यपरक एवं जागरूकता-आधारित समाचारों के माध्यम से आमजन को दवा सेवन के लाभों के प्रति प्रेरित करें और भ्रांतियों को दूर करें।
कार्यक्रम के दौरान जिला भी.बी.डी. पदाधिकारी डॉ. अभय कुमार यादव ने कहा कि लिंफैटिक फाइलेरियासिस (हाथीपांव) जैसी गंभीर बीमारी के उन्मूलन में सामुदायिक जागरूकता और मीडिया की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। जब तक आमजन तक रोग की रोकथाम, उपचार एवं एमडीए की सही जानकारी समय पर नहीं पहुंचेगी, तब तक अभियान की सफलता सुनिश्चित नहीं की जा सकती। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के क्षेत्रीय समन्वयक डॉ. हसीब ने बताया कि फाइलेरिया एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या है, जो मच्छरों के काटने से फैलती है और दीर्घकालिक दिव्यांगता का एक प्रमुख कारण है। इससे प्रभावित व्यक्तियों को हाइड्रोसील, लिम्फेडेमा एवं दूधिया सफेद मूत्र जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि फाइलेरिया से बचाव का एकमात्र प्रभावी उपाय फाइलेरिया-रोधी दवाओं का नियमित वार्षिक सेवन है। एमडीए कार्यक्रम के दौरान प्रतिदिन गतिविधियों की समीक्षा की जाएगी, ताकि किसी भी प्रकार की कमी न रह जाए।
राज्य सलाहकार बिनय कुमार ने कहा कि सरकार द्वारा संचालित स्वास्थ्य कार्यक्रमों की जानकारी जनसामान्य तक पहुंचाने में मीडिया की भूमिका अत्यंत सराहनीय रही है। उन्होंने मीडिया प्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे अपने प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक एवं डिजिटल माध्यमों के जरिए फाइलेरिया जैसी गंभीर बीमारी के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाएं।
वहीं पीरामल स्वास्थ्य के प्रतिनिधि श्री अविनाश ने रोगियों के अनुभव साझा करते हुए बीमारी के सामाजिक एवं मानवीय पहलुओं पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम के दौरान ग्लोबल हेल्थ स्ट्रेटेजीज़ के प्रतिनिधि श्री अंकित चौहान द्वारा एमडीए के महत्व पर आधारित एक लघु वीडियो का भी प्रदर्शन किया गया। कार्यशाला में राज्य एवं जिला स्तर के भी.बी.डी. पदाधिकारी, सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधि तथा स्थानीय मीडिया के प्रतिनिधि उपस्थित थे।





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